Sunday, November 25, 2018

सीमा पर बिना बंकर 'पाकिस्तान की गोलीबारी' झेलते लोग

जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे अरनिया इलाके की रहने वाली 45 वर्षीय सुषमा देवी आज भी रात को ठीक से सो नहीं पातीं.

रात होते ही उन्हें इस बात का डर सताने लगता है कि कहीं पाकिस्तान की तरफ़ से फिर से अंधाधुंध फ़ायरिंग न शुरू हो जाए.

वो अपने परिवार के साथ अरनिया के वॉर्ड नंबर 7 में रहती हैं.

उनके मोहल्ले में शायद ही कोई ऐसा मकान हो जहां पाकिस्तान की तरफ़ से की गई फ़ायरिंग के निशान न हों.

लगभग छह महीने पहले हुई फ़ायरिंग की वजह से छलनी हुई दीवारें आज भी उन्हें उस रात की याद दिला देती हैं जब उन्हें रातों रात अपना घर बंद करके सुरक्षित जगह पर भागना पड़ा था.

15 मई, 2018 के बाद लगभग 10 दिन तक इलाके में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे. 20 हज़ार की आबादी वाला अरनिया लगभग खाली हो गया था. दुकाने बंद हो गई थीं और बाज़ार वीरान. यहां तक कि कस्बे के पुलिस स्टेशन पर पाकिस्तान की तरफ़ से चले गोले गिरे थे. उस समय आधा दर्जन से ज़्यादा लोगों की उसी इलाके में मौत हो गई थी और 50 से ज़्यादा लोग गोलीबारी में घायल हुए थे.

अपने घर के आंगन में बैठी सुषमा देवी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "हमें आज भी डर लगता है. पता नहीं कब सीमा पार से गोले बरसने शुरू हो जायेंगे. हमें सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय भी मिलेगा या नहीं."

इस साल गर्मियों में उनके घर के आसपास के इलाकों को पाकिस्तान ने बार-बार निशाना बनाया और अंधाधुंध गोले बरसाए.

सुषमा देवी ने बताया, "जब मेरे इलाके में लगातार फ़ायरिंग चल रही थी तब मैंने भी अपना घर छोड़ पीछे रिश्तेदार के घर जाने का फैसला लिया. जब मैं घर के दरवाजे पर ताला लगा रही थी तो उसी वक़्त दो मोर्टार शेल हमारे घर में आ कर फटे. हम बड़ी मुश्किल से वहां से जान बचा कर भागे. अगर पास में कोई बंकर होता तो हम कम से कम यहीं पास में रह कर अपनी जान बचा सकते थे, लेकिन यहां ऐसा कोई इंतज़ाम नहीं था.''

सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सुषमा देवी कहती हैं, "हम लम्बे समय से सुन रहे हैं कि सरकार हमें सुरक्षित स्थानों पर बंकर बना कर देगी, लेकिन हमारे घर के आसपास अभी तक एक भी बंकर नहीं बनाया गया है.

उन्होंने बताया, "हमारे घर से कम से कम दो किलोमीटर दूर दो बंकर बनाने का कम शुरू हुआ है, लेकिन वो भी किसी काम के नहीं. दो बंकर के अन्दर कितने लोग अपनी जान बचाने के लिए रह सकेंगे."

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